आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ख़्वाब देहलवी: कोई चाँद चेहरा हमारा न होगा

khwab dehlvi famous ghazal koi chand chehra humara na hoga
                
                                                         
                            


कोई चाँद चेहरा हमारा न होगा
तो इस शहर-ए-नौ में गुज़ारा न होगा

इसी इक गुमाँ ने परिंदों को मारा
कि इस आसमाँ का किनारा न होगा

ये महरूमियाँ हैं या फंदा है मेरा
तुम्हें तो तग़ाफ़ुल ने मारा न होगा

अरे 'ख़्वाब' जी बे-वक़ूफ़ी भली है
कि दानाइयों से गुज़ारा न होगा

2 सप्ताह पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर