आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

Urdu Poetry: गर एक दिल से नहीं भरता मेरे यार का दिल

उर्दू अदब
                
                                                         
                            अब ऐसी वैसी मोहब्बत को क्या सँभालूँ मैं
                                                                 
                            
ये ख़ार-ओ-ख़स का बदन फूँक ही न डालूँ मैं

गर एक दिल से नहीं भरता मेरे यार का दिल
तो इक बदन में भला कितने साँप पालूँ मैं

न क़ब्र की है जगह शहर में न मस्जिद की
बताओ रूह के काँटे कहाँ निकालूँ मैं

सदाक़तों पे बुरा वक़्त आने वाला है
अब उस के काँपते हाथों से आईना लूँ मैं

कई ज़माने मिरा इंतिज़ार करते हैं
ज़मीं रुके तो कोई रास्ता निकालूँ मैं

मैं आँख खोल के चलने की लत न छोड़ सका
नहीं तो एक न इक रोज़ ख़ुद को पा लूँ मैं

हज़ार ज़ख़्म मिले हैं मगर नहीं मिलता
वो एक संग जिसे आइना बना लूँ मैं

सुनो मैं हिज्र में क़ाएल नहीं हूँ रोने का
कहो तो जश्न ये अपनी तरह मना लूँ मैं

~ नोमान शौक़

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।


 
एक महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर