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फ़िराक़ गोरखपुरी की ग़ज़ल: तेरी तस्वीर उतरती जाती थी

उर्दू अदब
                
                                                         
                            मौत इक गीत रात गाती थी
                                                                 
                            
ज़िंदगी झूम झूम जाती थी

कभी दीवाने रो भी पड़ते थे
कभी तेरी भी याद आती थी

ज़िक्र था रंग-ओ-बू का और दिल में
तेरी तस्वीर उतरती जाती थी

थे न अफ़्लाक गोश-बर-आवाज़
बे-ख़ुदी दास्ताँ सुनाती थी

जल्वा-गर हो रहा था कोई उधर
धूप इधर फीकी पड़ती जाती थी

हमा-तन-गोश ज़िंदगी थी 'फ़िराक़'
मौत धीमे सुरों में गाती थी

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एक घंटा पहले

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