मेरी आवाज़ सुनो, यूं जिस तरह बारिश को सुना जाता है,
ध्यान से नहीं, बेपरवाह नहीं,
हलके से क़दम, झिरझिराता हुआ,
पानी जो हवा है, हवा जो वक़्त है,
दिन विदा लेता हुआ,
रात अभी आई नहीं,
कुहरा शक़्ल लेता हुआ
जहां मोड़ बनता है,
वक़्त शक़्ल लेता हुआ ।
इस विराम के मोड़ पर,
मेरी आवाज़ सुनो, यूं जिस तरह बारिश को सुना जाता है ।
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