मेरी आवाज़ सुनो, यूं जिस तरह बारिश को सुना जाता है,
ध्यान से नहीं, बेपरवाह नहीं,
हलके से क़दम, झिरझिराता हुआ,
पानी जो हवा है, हवा जो वक़्त है,
दिन विदा लेता हुआ,
रात अभी आई नहीं,
कुहरा शक़्ल लेता हुआ
जहां मोड़ बनता है,
वक़्त शक़्ल लेता हुआ ।
इस विराम के मोड़ पर,
मेरी आवाज़ सुनो, यूं जिस तरह बारिश को सुना जाता है ।
बिना सुने, सुनो मैं क्या कहता हूं
आंखें अन्दर खुली हुईं, नींद से बोझल
और होशो-हवास दुरुस्त,
पानी बरसता है, हलके से क़दम, सरसराहट,
हवा और पानी, लफ़्ज़ बिना वज़न के :
हम क्या हैं और क्या हैं,
दिन और बरस, यह लमहा,
बिना वज़न का वक़्त और बोझिल दुख,
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