वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र के विट्ठलपुर गांव में प्रख्यात हिंदी कवि सुदामा पांडेय 'धूमिल' की प्रतिमा को पिछले दिनों असामाजिक तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। घटना की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों, साहित्य प्रेमियों और धूमिल के शुभचिंतकों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन असामाजिक तत्वों को नहीं मालूम हथौड़ा जिस पत्थर की प्रतिमा पे पड़ रहा है उससे वो प्रतिमा टूटेगी कवि नहीं, कवि तो पत्थर से निकल कर भाषा में बस चुका है, विचारों में बस चुका है। धूमिल भाषा में आदमी होने का नाम है, धूमिल कविता के मुहावरों को तोड़ने को तोड़ने वाले एक विद्रोही कवि का नाम है। अपने समय की विसंगतियों को तेज़ छुरी जैसी भाषा देते हैं। कविता में अंधेरे को और उसमें जुते आम आदमी को धूमिल सामने ला खड़ा करते हैं और समय का नायक घोषित कर देते हैं. धूमिल साहस के सॉंचे में ढले आदमकद इस्पात का नाम है। उनका जन्म वाराणसी के खेवली गांव में हुआ था। इसी शीर्षक से एक कविता भी लिखी है- तो आज धूमिल की कविता- खेवली
7 घंटे पहले
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