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आज का विचार: अज्ञेय

आज का विचार
                
                                                         
                            मैं देख रहा हूँ
                                                                 
                            
झरी फूल से पँखुरी

—मैं देख रहा हूँ अपने को ही झरते।
मैं चुप हूँ :

वह मेरे भीतर वसंत गाता है।

~अज्ञेय 

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7 घंटे पहले

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