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ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी: तुम ने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पे चढ़ा रखा है

ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी: तुम ने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पे चढ़ा रखा है
                
                                                         
                            मैं ने पूछा कि ये क्या हाल बना रखा है 
                                                                 
                            
न तो मेक-अप है न बालों को सजा रखा है 

छेड़ती रहती हैं अक्सर लब-ओ-रुख़सारों को 
तुम ने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पे चढ़ा रखा है 

मुस्कुराते हुए उस ने ये कहा शोख़ी से 
एक दीवाने ने दीवाना बना रखा है 

जेब ग़ाएब है तो नेफ़ा है बटन के बदले 
तुम ने पतलून का पाजामा बना रखा है  आगे पढ़ें

2 महीने पहले

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