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प्रेम किशोर 'पटाखा' की हास्य कविता: रंगीन सपनों का रजिस्ट्रेशन 

Prem kishore patakha best hasya poem rangeen sapnon ka registration
                
                                                                                 
                            कुछ होते हैं सपने रंगीन 
                                                                                                

तो कुछ हसीन 
कुछ सपने देखते नहीं 
दिखाते हैं
सपनों ही सपनों में 
आपको झुलाते हैं। 

मंच पर आते ही वे 
फूल मालाओं से लद गए 
आगे-पीछे दाएं- बाएं 
चमचों से बंध गए  आगे पढ़ें

1 month ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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