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नरेश सक्सेना: सभी चीज़ें लौट आती हैं

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जैसे नदी लौट आती है बारिश में
पेड़ों पर लौट आते हैं नए पत्ते वसंत में
वैसे ही लौट आते हैं पूर्वज
पर्वों-त्योहारों पर वे हमारे साथ होते हैं

हमारे सीने में उनकी धड़कन
होंठों पर उनके गीत
पाँवों में उनके पाँव
और हाथों में उनके हाथ होते हैं

अचानक कोई चौंक कर कहता है
देखो-देखो नाना की नाक और अम्मा की आँखें
सुनो-सुनो दादी की हँसी और पहचानो
यह किसकी आवाज़

देखता हूँ
लौट आई है नई त्वचा मेरे घावों पर

सभी चीज़ें लौट आती हैं
तो ज़रूर लौट आएगी
अन्याय से लड़ने की इच्छा और ताक़त
इस शरीर में। 
 

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9 घंटे पहले

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