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Hindi Poetry:  तुम्हारी आंखों का काजल हूं एक आवारा बादल हूं मैं

कविता
                
                                                         
                            तुम्हारी आंखों का काजल हूं 
                                                                 
                            
एक आवारा बादल हूं मैं। 
मेरे लफ़्ज़ों का ऐतबार तो कर,
एक प्यासा सावन हूं मैं।

लाल पुष्प हूं तुम्हारे 
केशों में गुंथा-सा,
जो खुशबू बन कर 
महक जाता सांसों में।

जब कोई पुरवा 
मादक-सी बही जब,
तेरे होठों पर गीत बन 
उतर जाता हूं मैं।

उन गीतों में बसा 
एक तराना हूं मैं,
तुम जिसका जिक्र 
न कर पाई कभी 
वही अफसाना हूं मैं।

-राकेश धर द्विवेदी 

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19 घंटे पहले

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