आज का शब्द- परिधि और राजकमल चौधरी की कविता: चिंता अर्थहीन बेबसी

आज का शब्द- परिधि
                
                                                             
                            अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए उसके प्रचार-प्रसार के लिए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ अभियान की शुरुआत की है। इस कड़ी में साहित्यकारों के लेखकीय अवदानों को अमर उजाला और अमर उजाला काव्य हिंदी हैं हम श्रृंखला के तहत पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। हिंदी हैं हम शब्द श्रृंखला में आज का शब्द है- परिधि, जिसका अर्थ है-  बाहरी सीमा, गोल घेरा, वृत्त की रेखा। प्रस्तुत है राजकमल चौधरी की कविता: चिंता अर्थहीन बेबसी।
                                                                     
                            


आकाश के अस्थिर चित्र नीचे झुकेंगे और 
झुकेंगे, झूलेंगे मेघ 
ऊंचे वृक्षों के माध्यम से, साधन से धरती 
(कुंवारी है अब तक जिसकी पिपासा...) 
ऊपर उठेगी 
उठती, उभरती, उजागर होती चली जाएगी! 
और, 
अनेकों निरुद्देश्य, निरीह लोग यों ही जग जाएंगे, 
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1 year ago

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