आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

नासिर बशीर: सुब्ह कुछ शाम कुछ ख़याल रहा, ये मोहब्बत में अपना हाल रहा

nasir bashir famous ghazal subah kuch shaam kuch khayal raha
                
                                                         
                            


सुब्ह कुछ शाम कुछ ख़याल रहा
ये मोहब्बत में अपना हाल रहा

जनवरी में कभी दिसम्बर में
ज़िक्र तेरा तमाम साल रहा

मैं तुझे आज भी नहीं समझा
तू मिरे वास्ते सवाल रहा

मैं कि आँखों से हाथ धो बैठा
तू कि चेहरे को है सँभाल रहा 
 

एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर