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‘ढलती शाम’ पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

ढलती शाम पर शायरों के अल्फ़ाज़
                
                                                         
                            शाम ढलने से फ़क़त शाम नहीं ढलती है
                                                                 
                            
उम्र ढल जाती है जल्दी पलट आना मिरे दोस्त
- अशफ़ाक़ नासिर


वो न आएगा हमें मालूम था इस शाम भी
इंतिज़ार उस का मगर कुछ सोच कर करते रहे
- परवीन शाकिर
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5 वर्ष पहले

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