ख़याल जिस का था मुझे ख़याल में मिला मुझे
सवाल का जवाब भी सवाल में मिला मुझे
- मुनीर नियाज़ी
तिरे ख़याल में मैं हूँ मिरे ख़याल में तू
मिरे बग़ैर तिरी दास्ताँ रहे न रहे
- अबु मोहम्मद वासिल बहराईची
मिरा ख़याल तिरी चुप्पियों को आता है
तिरा ख़याल मिरी हिचकियों को आता है
- कुमार विश्वास
ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें
साक़िया साक़िया सँभाल हमें
- अहमद फ़राज़
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