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‘ख़याल’ पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

‘ख़याल’ पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़
                
                                                         
                            ख़याल जिस का था मुझे ख़याल में मिला मुझे
                                                                 
                            
सवाल का जवाब भी सवाल में मिला मुझे

- मुनीर नियाज़ी


तिरे ख़याल में मैं हूँ मिरे ख़याल में तू
मिरे बग़ैर तिरी दास्ताँ रहे न रहे

- अबु मोहम्मद वासिल बहराईची

मिरा ख़याल तिरी चुप्पियों को आता है
तिरा ख़याल मिरी हिचकियों को आता है

- कुमार विश्वास



ले उड़ा फिर कोई ख़याल हमें
साक़िया साक़िया सँभाल हमें

- अहमद फ़राज़
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5 वर्ष पहले

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