हंसते-बतियाते जा रहा था एक जोड़ा,
सामने से एक और जोड़ा आया।
दोनों मर्दों ने तिरछी नज़रों से देखा
एक-दूसरे की औरत को—
फिर चल पड़े वैसे ही
हंसते-बतियाते।
- आतिश
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X