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Urdu Poetry: कोई मुझ को तकता है कनखियों के पहलू में

उर्दू अदब
                
                                                         
                            कोई मुझ को तकता है कनखियों के पहलू में
                                                                 
                            
चेहरा मुस्कुराता है हिचकियों के पहलू में

हँसती मुस्कुराती वो मुझ को तकती रहती है
चाँद जैसी इक लड़की खिड़कियों के पहलू में

प्यार पलता है अक्सर सख़्त-दिल के कोनों में
बारिशें बरसती हैं बिजलियों के पहलू में

हाथ छोड़ जाने का माह-ए-ग़म दिसम्बर है
पत-झड़ें तड़पती हैं सर्दियों के पहलू में

घर के माँझे की डोरी छत पतंग और बच्चा
अब कहाँ ये मिलते हैं चरखियों के पहलू में

अपने बीवी बच्चों की याद में तड़पते हैं
सरहदों पे फ़ौजी दिल वर्दियों के पहलू में

लहलहाते जंगल की खिलखिलाती बारिश थी
मोर नाचते देखे हिरनियों के पहलू में

वो हसीं बहारों सी बाग़ में जब आती है
फूल खिलने लगते हैं तितलियों के पहलू में

नींद जब खुली 'उल्फ़त' उस की याद आ बैठी
करवटें लीं साँसों ने गर्मियों के पहलू में

~ जावेद उल्फ़त

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4 घंटे पहले

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