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मजदूर का मान: यह मजदूर चाहता तुमसे, बस थोड़ा-सा सम्मान

majdoor ka maan hindi kavita by ajay kumar biyani
                
                                                         
                            

मजदूर का मान
दो प्रेम के मीठे से बोल,
भर देते तन-मन में जान,
यह मजदूर चाहता तुमसे,
बस थोड़ा-सा सम्मान।
परिवार को पालना जिसने,
कर्म की कसौटी पर धर्म बनाया,
पढ़ न सका जीवन की पुस्तक,
पर श्रम का मर्म समझ पाया।
दिन-रात बोझा ढोता है,
सिर पर जिम्मेदारी का भार,
हँसकर सहता धूप, वर्षा,
मौसम के हर टेढ़े प्रहार।
अरे ओ ऊँचे महलों वालो,
तुमने कब उसका ध्यान किया?
जिसके पसीने की बूंदों ने,
तुम्हारे सपनों को मकान दिया।
कर्म को साथी मान लिया,
भाग्य से कभी न की शिकायत,
तन-मन से वह मजबूत बहुत,
फिर भी मिली उसे उपेक्षा, आहत।
क्यों करते हो गरीबी का उपहास,
जिसके नसीब में छल नहीं,
आज तुम्हारा समय उजला है,
कल उसका भी होगा यहीं।
अरे ओ मोटे धन वालों,
क्यों इतना करते अभिमान?
जिसके श्रम से जग चलता है,
वही है धरती की पहचान।
मजदूरों की आवाज सुनने वाले,
अब भी हैं दुनिया में चंद,
जीवन की गाड़ी चलती रहती,
पर हौसला रहता प्रचंड।
मेहनत, ईमान और सादगी में,
सूखी रोटी भी लगती खास,
बेईमानी से भरा खजाना,
नहीं चाहिए ऐसा विलास।
अरे ओ तिरस्कार करने वालो,
प्रेम से घटता नहीं सम्मान,
थोड़ा अपनापन दे दो बस,
यही है मानवता का गान।
मजदूर का पसीना मोती है,
उसमें जीवन की सच्ची शान,
जो श्रम को पूजा मान सके,
वही है सच्चा इंसान।

- अजय कुमार बियानी
इंजीनियर 

6 घंटे पहले

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