आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हां भला अब इश्क़ में हम क्या करेंगे

                
                                                         
                            हां भला अब इश्क़ में हम क्या करेंगे
                                                                 
                            
बस तेरा ही रास्ता देखा करेंगे

जो किया था अहद मैने तुझसे उसका
उम्र भर अब हम वही ईफ़ा करेंगे
(ईफ़ा: प्रतिज्ञा पालन)

तुमको पाकर क्यों खो बैठे अब तुम्हें फिर
बाद हम तेरे यही सोचा करेंगे

इस तरह रातें हमारी गुज़रेंगी अब
याद कर करके तुझे रोया करेंगे

बाद तेरे किसको सोचेंगे भला हम
तेरे पीछे ज़िंदगी ज़ाया करेंगे

लौटकर आयेंगे कब ये दुबारा
हम गुज़रते वक्त का पीछा करेंगे

ये गुज़िश्ता साल तेरे कैसे बीते
तुझसे हम अब ये नहीं पूछा करेंगे
(गुज़िश्ता: पिछला/अतीत)

अब भरेंगे घाव अपने सारे गिनकर
हम पुराने ज़ख्म क्यों पाला करेंगे

जब कभी भी धूप से घबराओगे तुम
हम तुम्हारे सर पे फिर साया करेंगे

दोस्तों से बातें अपनी करते करते
नाम को तेरे नहीं लाया करेंगे

ख़ुद को ज़िंदा रखने की उस्रत में आख़िर
अब खुशी के पल नहीं खोया करेंगे।

-अनमोल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
41 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर