आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

पापा का घर ।

                
                                                         
                            पापा का घर—
                                                                 
                            
यह नाम सुनते ही
मन में एक हलचल-सी होने लगती है।

आज भी जब कोई
उस गाँव का नाम लेता है,
मेरी आँखों के सामने
वही पुरानी हवेली खड़ी हो जाती है।

वह हवेली,
जो अब खंडहर होने की तरफ़ बढ़ चुकी है,
जिसे कभी दादाजी ने
बड़े मन से संवारा था।

उसके आँगन में
पापा का लगाया हुआ एक पेड़ था।

वह पेड़ आज भी वहीं खड़ा है,
जैसे अब भी
उनके लौट आने का इंतज़ार कर रहा हो।

हम जब भी
उनके साथ उस गाँव की गलियों में जाते थे,
उनके भीतर का बच्चा
चुपचाप बाहर आ जाता था।

वही बच्चा,
जो कभी साइकिल उठाकर
बिना किसी मंज़िल के
पूरा गाँव नाप आता था।

गाँव का नाम भर लिया जाता,
और पापा की कहानियाँ शुरू हो जातीं।

हमारी कितनी ही शामें
उनके बचपन के किस्से सुनते-सुनते
कब बीत जाती थीं,
पता ही नहीं चलता था।

हर गर्मियों की छुट्टियों में
वह उस घर की हर दीवार को
एक बार छूकर आना चाहते थे।

शायद उन्हें लगता था
यह गाँव उन्हें कभी नहीं छोड़ेगा।

उनकी मुस्कान के पीछे भी
एक लंबी ख़ामोशी रहती थी।

उन्हें भरोसा था—
एक दिन सब ठीक हो जाएगा।

आँगन का दरवाज़ा
फिर से उनके लिए खुल जाएगा।

उनकी ज़िंदगी
शहर और गाँव के बीच बँटी रही।

घर शहर में था,
पर मन हमेशा
उसी पुराने आँगन में बैठा रहता था।

आज भी लगता है,
वह टूटा हुआ दरवाज़ा खुलेगा,
और पापा मुस्कुराते हुए सामने खड़े होंगे।

जैसे कुछ बदला ही न हो।
जब भी उनसे पूछते थे—
"सब ठीक है?"
वह हमेशा मुस्कुराकर कहते—
"हाँ, सब ठीक है।"

अब समझ आता है,
उस "ठीक हूँ" के पीछे
कितनी बातें छिपी थीं।

अपनी उदासी
वह मुस्कान के पीछे रख देते थे।

कभी-कभी
अपनी डायरी में कुछ लिखते,
और शायद
हर शब्द के साथ
थोड़ा-थोड़ा बिखर जाते थे।

वह अपनों के बीच रहकर भी
अपनेपन की तलाश में रहे।
शायद सारी उम्र
सिर्फ़ एक घर लौटना चाहते थे।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर