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मैं अच्छों के लिए अच्छा हूं मैं बुरों के लिए भी अच्छा हूं - लाओत्से

lao tzu poetry in hindi sadhu ka koi nij mann nahin hota
                
                                                         
                            साधु का कोई निज मन नहीं होता 
                                                                 
                            
उसे दूसरों की आवश्यकताओं का आभास होता है 

मैं अच्छों के लिए अच्छा हूं
मैं बुरों के लिए भी अच्छा हूं
क्योंकि अच्छाई गुण है 
मैं उनमें विश्वास करता हूं जो विश्वासपात्र हैं 
मैं उनमें भी विश्वास करता हूं 
जो विश्वासपात्र नहीं हैं 
क्योंकि श्रद्धा-विश्वास गुण है

साधु संसार के प्रति सुनम्य और संवेदनशील होता है
फिर भी वह भ्रामक प्रतीत होता है 
लोग उनके दर्शन करते और उपदेश सुनते हैं
जबकि उसका व्यवहार छोटे बालक के
समान होता है। 

साभार - ताओ-ते-छिड.
अनुवाद - वन्दना देवेन्द्र
4 वर्ष पहले

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