आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

कुछ तो हैं

                
                                                         
                            कुछ तो हैं
                                                                 
                            
पर हैं बहुत अजीब
ऐसा भी क्या है
अपने बीच
ना आना तेरे करीब
ना होना जुदा है तुझसे
ना तू चाहिए, ना खोना है तुझे
ना ही बिछड़ना, ना ही साथ रखना है तुझे
कुछ तो हैं
पर हैं बहुत अजीब
ऐसा भी क्या है
अपने बीच
ना बातें छुपानी.., ना ही बतानी है तुझे
ना सुनना, ना ही सुनाना है तुझे
ना दीदार चाहिए , ना ही देना है तुझे
कुछ तो हैं
पर हैं बहुत अजीब
ऐसा भी क्या है
अपने बीच
ना पास बैठना, ना ही बिठाना है तुझे
पता है मैं किसी ओर की हुं
तभी तो ना पास आना है तेरे
मुमकिन नहीं फिर भी ....
एक बार गले लगाना है तेरे
बहुत अजीब है पर.....
एक बार मिलना है तुझे......
-..भावना नज़्म रूही..
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
41 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर