कुछ तो हैं
पर हैं बहुत अजीब
ऐसा भी क्या है
अपने बीच
ना आना तेरे करीब
ना होना जुदा है तुझसे
ना तू चाहिए, ना खोना है तुझे
ना ही बिछड़ना, ना ही साथ रखना है तुझे
कुछ तो हैं
पर हैं बहुत अजीब
ऐसा भी क्या है
अपने बीच
ना बातें छुपानी.., ना ही बतानी है तुझे
ना सुनना, ना ही सुनाना है तुझे
ना दीदार चाहिए , ना ही देना है तुझे
कुछ तो हैं
पर हैं बहुत अजीब
ऐसा भी क्या है
अपने बीच
ना पास बैठना, ना ही बिठाना है तुझे
पता है मैं किसी ओर की हुं
तभी तो ना पास आना है तेरे
मुमकिन नहीं फिर भी ....
एक बार गले लगाना है तेरे
बहुत अजीब है पर.....
एक बार मिलना है तुझे......
-..भावना नज़्म रूही..
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