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सितारों की शाम को

                
                                                         
                            रुला देते हैं कातिल
                                                                 
                            
खुले आसमान को
बनते यूं मुलजिम हम
इश्क के पैगाम को
वक्त कहता इश्क पूछूं
इश्क कहता वक्त मांगू
बताते तहरीर अपनी
सितारों की शाम को
उनसे हुई गुफ्तगू
अरसों की बात लगती है
भुला देते है दिन दिन
हुस्न-ए-ला-जवाल जो
वक्त कहता इश्क पूछूं
इश्क कहता वक्त मांगू
बताते तहरीर अपनी
सितारों की शाम को
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10 घंटे पहले

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