“ मज़बूत सोच”
मज़बूत सोच से जीत खिलती है,
हर हार में भी राह मिलती है।
जीवन है जैसे अखाड़ा कोई,
विश्वास से ही मंज़िल मिलती है।
संघर्ष की धरती पर जब कदम थकने लगते हैं,
विश्वास की डोर पकड़, सपने सच होने लगते हैं।
गिरना कोई हार नहीं, बस सीख का अवसर है,
हर चोट में छिपा हुआ, आगे बढ़ने का स्वर है।
जो खुद को संभाल सके, वही जग को थामेगा,
दूसरों को उठाकर ही, अपना मन मानेगा।
जीत वही सच्ची होगी, जो दिल को छूती हो,
मज़बूत सोच की धारा, जीवन में मिलती हो।
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