हार न मान तू यार मेरे, यूँ थककर न बैठ तू,
जीवन की बाधाओं को, बस पार करता जा।
शांत चित्त रहकर अपना, तू कर्म करता जा,
छोड़ संसार की बातें, छोड़ वह रिश्ते-नाते,
जो विपत्ति के समय, काम न आते।
संघर्ष तो जीवित होने की निशानी है,
बिना संघर्ष के, कैसी यह जवानी है?
बीज जब टूटता है, तब नव-अंकुर निकलता है,
व्यक्ति जब टूटता है, तब प्रखर व्यक्तित्व निखरता है।
इतिहास उसी का बनता है, जो संघर्ष में टिकता है,
यूँ न निराश करो मन को, बस निरंतर प्रयास करो।
- गणपत सिंह तंवर
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