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यह अगस्त मतवाला है

                
                                                         
                            तोड़ गुलामी
                                                                 
                            
के बंधन को
स्वर्णिम याद
दिलाने वाला
यह अगस्त
कितना मतवाला ? खून गरम था
वीरों का
बाँध न पाई
ये जंजीरे
चढ़ गए
फांसी के फंदे
यह अगस्त
है हिम्मत वाला।
बह चली तोप
लज्जित हथगोले
पिघल गई
बंदूकें सब
यह उत्साह
निराला है
यह अगस्त
मतवाला है ।
निद्रा से हमें
जगाने वाला
नव प्रकाश
को लाने वाला
मुर्दों की भी
बाँह फड़कती
नए जोश
को लाने
वाला
नहीं झुकेगा
मेरा तिरंगा
ललकारेंगे
लाल किले
से देश
देखने वाला है
यह अगस्त
मतवाला है ।
मंगल पांडे
वीर कुंवर सिंह
रानी झांसी
बेगम हजरत
अशफाक उल्लाह
अमर रहे
इनकी कुर्बानी
आजादी की
अमर निशानी
आओ
प्रण हम लेते
हैं अक्षुण्ण
हो मेरी आजादी
देश न झुकने
वाला है
यह अगस्त
मतवाला है ।।
 
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