सांसे ही है काफी
जिए जाओ खुशी से
जो न मिल सका
मत विलापो उसे
मुठ्ठी में है जो सहेजो उसको
खुली किताब बन कर जिओ
मिथ्या के चंगुल में मत आओ
हसरतों का क्या है
जीने न देगी मरने तक
ख़्वाहिशों का तो समंदर है
डूब जाओगे पल भर में
सांसे ही हमारी हैं
बाकी तो छलावा है
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