जब युद्ध
किसी नशे के विरुद्ध
छेड़ा जाए
वाजिब
लगता है!
जब युद्ध ही
नशा बन जाए तो
मात खाजाती हैं
मान्यताएँ l
क्षुब्ध हो कर
मूर्च्छा में चली जाती हैं
संवेदनाएँ l
लहूलुहान
सिसकियाँ
छटपटाती हैं l
मछलीमार के काँटे से
बिंधी मछली की तरह
और
जीवन को नहीं
बल्कि
अधूरी मृत्यु को
पूर्ण करने की
भीख माँगती हैं l
-मधुश्री के.
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