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वैवाहिक वर्षगांठ

                
                                                         
                            नभ पर चमकते हैं जैसे लाखो सितारे
                                                                 
                            
सहेज रखे हैं प्रकृति जैसे ये सारे नजारे

साथ सलामत रहे आपका यूं ही हरदम
जब तक धरा पर है नदी ओ झरने सारे

बहता है जैसे ये समंदर हर क्षण निरंतर
जैसे रुकता नही जग का कोई उपक्रम

ऐसे बढ़ते रहो तुम भी प्रतिक्षण प्रतिपल
आए जो जो रोड़े वो सब हट जाए सारे

भरी रहे खुशियां अपार जीवन में प्रतिदिन
वैभव, सुयश बैठे रहें हरदम आपके द्वारे

पूरे हो आपके जीवन के सकल मनोरथ
इसी के साथ हम यही कामना करते हैं

 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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