वह डरती है ,पर
डराती नहीं |
वह रोती है, पर
रुलाती नहीं |
वह संवारती है, पर
बिगाड़ती नहीं |
वह दयालु है, पर
कमजोर नहीं |
वह सबका दर्द सुनती है, पर
अपना दर्द सुनाती नहीं |
वह सबका पेट भरती है, पर
खुद भरपेट खाती नहीं |
वह सबके मन को पढ़ती है, पर
उसे कोई पढ़ पाता नहीं |
वह सबका रोष सहती है, पर
क्रोध कभी बरसाती नहीं।
वह स्त्री है,
इसलिए नहीं कि वह सब सह लेती है,
बल्कि इसलिए कि टूटकर भी
अपनों के लिए मुस्कुराती रहती है।
वह भी इंसान है,
फिर भी हर बार
सबसे पहले अपनों का सुख चुनती है।
क्योंकि वह एक स्त्री है.
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