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नमन..

                
                                                         
                            हर खोई ज़िंदगी अनमोल थी...
                                                                 
                            

हर खोई ज़िंदगी अनमोल थी,
किसी की उम्मीद, किसी का मोल थी।
किसी माँ की आँखों का सपना थी,
किसी पिता के संघर्षों का फल थी।

किताबों में जो कल सँवर रहा था,
वो भविष्य आज बिखर रहा था।
हँसते चेहरों की वो रौनक सारी,
एक पल में ही कहीं खो गई प्यारी।

नन्हे सपनों ने उड़ान भरी थी,
मंज़िल की राहें अभी खुली थीं।
पर वक्त ने ऐसा मोड़ दिखाया,
हर दिल को गहरे दर्द में डुबाया।

नमन है उन सब उजले चेहरों को,
जो छोड़ गए अपनों के शहरों को।
उनकी यादें सदा अमर रहेंगी,
दिलों में दीपक बनकर जलेंगी।

हर खोई ज़िंदगी अनमोल थी,
न कोई कम थी, न कोई अनजानी थी।
जो चले गए, वे सितारे बन गए,
और उनकी कहानी सदा के लिए हमारी थी।

 
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एक घंटा पहले

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