तेरह माह बाद मरने के
मरे हुए जा रहे बताए
देशप्रेम वह पुण्य क्षेत्र है
जिन्दा जहां गए दफनाए
सत्ता सुख मादक सारहीन
यह नहीं समझते हैं नेता
मद में डूबे रहकर ही वे
बनते परपीड़क उरजेता
असली दांत छिपाकर उनके
जाते नकली दांत दिखाए
आज मद्यपी राजनीति ने
बदला पारम्परिक तकाजा
निकला नहीं देशभक्तों का
कोई फूलों भरा जनाजा
आम आदमी ने अभिनन्दन
में नारे तक नहीं लगाए
एक नहीं, छह बलिदानों का
खुलकर किया गया अवमूल्यन
देशभक्ति को मान न देना
सत्ताधीशों का गर्हितपन
नीच निठल्ले नेताओं को
अब औकात दिखाई जाए
जो संसद में झूठ बोलकर
रहे बांधते पुल बातों के
वास्तव में ऐसे नेता ही
भूत कहे जाते लातों के
सच्चा रंग सामने आया
कच्चा अब तक रहे जमाए
-महेश चन्द्र त्रिपाठी
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