भय भय भय क्या है ये भय
क्यों डराता है इतना भय
कर देता है पूरी जिंदगी का क्षय
डर डर कर जिंदगी जीते हैं
क्या हमें मिलते हैं
पूरे सपनों को खा जाता है
कितना विकराल
रूप लेकर डराता है
डरे रहते हैं हम
सहमें रहते हैं हम
पूरी जिंदगी का
सत्यानाश कर देता है
भय के डर से हम
आगे बढ़ नहीं पाते
गिरने का डर
हारने का डर
कितने तरह का डर
इंसान को सताते हैं
डर-डर कर जीने से ही हम
जीवन में नाकामयाब हो जाते हैं
इसको एक बार
फटकार लगाना है
इसे हराना है
डर को भी दिखाना है
तुमसे ज्यादा हौसला हमारा है
भय तुम ना डराना हमें
तुम्हें तुम्हारा औकात दिखाना है
हां हमें हिम्मत से,
मंजिल तक पहुंच जाना है
रोक ले अगर तुम्हारे बस में
रोक पाना है................।।
-ममता तिवारी
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