इश्क़ ने दिल को अजब इक रौशनी बख़्शी मुझे,
रात थी गहरी मगर फिर भी चाँदनी बख़्शी मुझे।।
उसकी आँखों में समंदर भी था,साहिल भी था,
एक ही नज़र ने पूरी ज़िंदगी है बख़्शी मुझे।।
ज़िक्र उसका जब भी आया, लब दुआ बनते गए,
हर ख़ुशी से बढ़कर उसकी बंदगी बख़्शी मुझे।।
दूरियाँ भी प्यार की तासीर कभी कम कर न सकीं,
हर जुदाई ने सदा नई दीवानगी बख़्शी मुझे।।
मैंने चाहा ही नहीं कभी दुनिया की झूठी शोहरतें,
एक सच्ची मुस्कान उसकी ही सभी बख़्शी मुझे।।
इश्क़ सौदा नहीं , सज्दा है,अमानत है जनाब,
इस यक़ीं ने रूह की हर तिश्नगी बख़्शी मुझे।।
एमके सिंह' इश्क़ में खोकर ही ख़ुद को पा लिया,
उसकी उल्फ़त ने मेरी ही ज़िंदगी बख़्शी मुझे।।
- एम के सिंह
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