पहली मोहब्बत का असर आज भी ज़िंदा है,
सूखा हुआ गुलाब मेरी किताब में ज़िंदा है।।
वो नाम जिसने पहली बार धड़कनें लिखीं,
आज भी मेरे हर एक हिसाब में ज़िंदा है।।
न उसने लौटकर आने का कोई वादा किया,
फिर भी इंतज़ार दिल के, शबाब में ज़िंदा है।।
किसी और का होकर भी वो अपना-सा लगे,
ये कैसा इश्क़ है जो हर नक़ाब में भी ज़िंदा है।।
वक़्त ने लाख जुदाई की धूल उड़ाई मगर,
उसकी ख़ुशबू अभी तक गुलाब में ज़िंदा है।।
जिसे खोकर भी मैंने, दुआओँ में सँजोए रखा,
आज भी वही रिश्ता मेरी हर इबादत में ज़िंदा है।।
लोग कहते हैं कि तुम पहली मोहब्बत भूल जाओ,
कैसे भूलें उसे, वो तो रूह के जवाब में ज़िंदा है।।
कवि एमके सिंह' पहली मोहब्बत कोई किस्सा नहीं,
मर जाएँ तो भी, वो दिल के ख़िताब में ज़िंदा है।।
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