गीत
है विनय,आपसे,भक्त को तार दो।
द्वार हम,हैं खड़े,शारदे प्यार दो।।
ज्ञान हो,ध्यान हो,वेद की साधना।
हम करें,नित्य ही,मातु आराधना।।
तेज हो,सूर्य सा,कर कृपा हैं शरण।
नंदिता,पूजिता,हैं गिरे हम चरण।।
मीत हो,जीत का,आप उपहार दो।
द्वार हम,हैं खड़े,शारदे प्यार दो।।
राह हम,जो चलें,सत्य का पाथ हो।
द्वेष मन,में न हो, श्रेष्ठ का साथ हो।।
हो हृदय,भी विमल,मातु भयहारिणी।
मंत्र हो,प्रेम का,हो जगततारिणी।।
कंठ पे,नाम हो,माँ अमिय धार दो।
द्वार हम,हैं खड़े,शारदे प्यार दो।।
यह धरा,देश की,मातु है पावनी।
ताज हो,सिर सदा,शांति की आसनी।।
हम सदा,हों सफल,पूर्ण हर काम हो।
ओम ही,ओम हो,माँ अमर नाम हो।।।
पाप का,नाश हो,हाथ तलवार दो।
द्वार हम,हैं खड़े,शारदे प्यार दो।।
पाठ हम,तो पढ़े,मातु बस प्रीति का।
हो सृजन,आप ही,छंद हो गीतिका।।
बुद्धि दो,शुद्धि दो,हाथ माँ थामना।
सब सुखद, हो सरस,बस यही कामना।।
लेखनी,को सदा,आप विस्तार दो।
द्वार हम,हैं खड़े,शारदे प्यार दो।।
मीना भट्ट*सिद्धार्थ*
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