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नारी-शक्ति(2)

                
                                                         
                            नारी में वह शक्ति है….जो कुछ भी कर सकती है !
                                                                 
                            
नारी में वह शक्ति है….जो कुछ भी कर सकती है !
नारी उजाला फैला सकती है, अंधकार भी ला सकती है।
नारी ज्ञान बाँट सकती है, अज्ञान भी फैला सकती है।
नारी क्षमा कर सकती है, दंड भी दे सकती है।
नारी नाम कमा सकती है, नाम गँवा भी सकती है।
नारी प्रेम जगा सकती है, घृणा भी कर सकती है।
नारी सहयोग कर सकती है, विरोध भी कर सकती है।
नारी समृद्धि ला सकती है, दरिद्रता भी ला सकती है।
नारी मान बढ़ा सकती है, मान घटा भी सकती है।
नारी एकता ला सकती है, विभाजन भी कर सकती है।
नारी सौभाग्य बढ़ा सकती है, दुर्भाग्य भी ला सकती है।
नारी त्याग सकती है, लालच भी कर सकती है।
नारी घर बसा सकती है, घर उजाड़ भी सकती है।
नारी सुख बाँट सकती है, दुख भी बाँट सकती है।
नारी सम्मान दे सकती है, अपमान भी कर सकती है।
नारी आशा जगा सकती है, निराशा भी फैला सकती है।
नारी रूप सजा सकती है, रूप बिगाड़ भी सकती है।
नारी न्याय कर सकती है, अन्याय भी कर सकती है।
नारी साहस दिखा सकती है, कायरता भी दिखा सकती है।
नारी कोमलता दिखा सकती है, कठोरता भी दिखा सकती है।
नारी जीवन सँवार सकती है, जीवन बिगाड़ भी सकती है
-नरेश राजा'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

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