आहार की जिन्दगी आहार पर जारी।
कोई भूख मिटाने को खाना ढूंढता है।
तो,
कोई भूख न लगने की दवा ढूंढता है।
भूखी, प्यासी मछली,
कहे जल से, जल ही मेरा जीवन है।
और भूखा मछुआरा,
कहे मछली से मछली मेरा जीवन है।
दुनिया में,
कोई शाकाहारी तो कोई मांसाहारी।
कोई अल्पाहारी तो, कोई निराहारी।
सबकी,
जिन्दगी सबके आहार पर है जारी।
बिना आहार,
के जिन्दगी जीना हो जाता है भारी।
ये जिन्दगी है जनाब! ये
कभी लगे मीठी तो कभी लगे खारी।
फिर,
तो बिन आहार के जिन्दगी भी हारी।
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