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कविता : इंप्रेस....

                
                                                         
                            मम्मी, बेटी आज कल जब
                                                                 
                            
घर से बाहर जाती है
रात को घर में बहुत
देर से लौट आती है

पता नहीं कहां जाती
न कुछ बताती है
मुझ को तेरी ही चिंता
बहुत सताती है

घबरा रहा है
दिल तो मेरा
किसी छोकरे से चक्कर
तो नहीं तेरा ?

बेटी, अब मैं छोटी नहीं
बड़ी हो चुकी हूं
अपने पैरों पर
खड़ी हो चुकी हूं

मां वैसे तो मैं आप की
बेटी लगती हूं
मगर मैं बोए फ्रेंड बगैर
नहीं जी सकती हूं

ओ के मां आज उस से
मिलने जाऊंगी
कल या परसों वापस
घर को आऊंगी

आप से मां थोड़ा
अभी स्पेस हूं
फिल हाल मैं बॉय फ्रेंड
से इंप्रेस हूं
फिल हाल मैं बॉय फ्रेंड
से इंप्रेस हूं.......

 
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3 दिन पहले

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