ज्ञान कितना भी ग्रहण कर लो
रह जाता ही है अधूरा
अहंकार ज्ञान पर डालता पर्दा
करता नाश व्यक्तित्व का पूरा
ज्ञान कहीं पर किसी से भी मिले
उसे ग्रहण कर लेना चाहिए
यह सोच कर की आपसे वो तुच्छ है
कभी घमंड नहीं करना चाहिए
ज्ञान का प्रकाश इंसान को
विनम्र और तेजस्वी बनाता है
उसके विवेक को तराश कर
व्यक्तित्व को चमकाता है
ऐसा इंसान अपने विवेक से
औरों को भी करता है प्रेरित
मान सम्मान समाज में बढ़ता
बढ़ जाती है इज्जत
ज्ञान बांटने से यह कभी भी
कम होता नहीं बढ़ जाता है
इसे पाने की और भी
चाहत व भूख को बढ़ाता है
पर जिसे ज्ञान का होता घमंड
वो विनाश की ओर ही जाता है
रावण है इसका साक्षात उदाहरण
अपनों को भी साथ डुबाता है
-निकुंज
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