आजादी सींचा खूनों से वीर जवान शहीदों ने
जलियांवाला बाग की मिट्टी सनी थी खूनों से
सेलुलर जेल कराह रही थी यातनाओं से
आजादी नहीं मिली आसानी से
वीर जवान शहीदों के बलिदानों से
तन था कन-कन देश प्रेम भींगा उन वीर जवान शहीदों में
था वंदे मातरम जोश उमंग उत्साह दे रहा
आजादी का जुनून रक्त उबल-उबल था उफन रहा
थे फांसी के फंदे बलिदानी चूम रहे
मस्तक भारत माता की धूल लगा के
आजादी नहीं मिली आसानी से वीर जवान शहीदों के बलिदानों से
नम होते नयन नमन करता शीश उन्हें
ना भूले शहीदों की शहादत को जिसने तोड़ी गुलामी की जंजीरों को
स्वतंत्रता का स्वाद चखाया उन वीर जवान शहीदों ने
स्वतंत्रता का स्वाद चखाया उन शहीद बलिदानों ने
सभ्यता संस्कृति बचाया उन वीर जवानों ने
भारत माता के चरणों में लहू चढ़ाया वीर जवान शहीदों ने
आजादी नहीं मिली आसानी से वीर जवान शहीदों के बलिदानों से
शत शत नमन उन बलिदानियों को
-ओम चंद्र चौधरी
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