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दर्द -ए -दिल

                
                                                         
                            फिर मुझे दर्द-ए-दिल सुना गया कोई,
                                                                 
                            
फिर मुझे अपनी निशानी बता गया कोई ।
ये हुस्न , ये जलवे , ये अदाएँ , ये फिज़ा ,
सभी में आज अजब सी कोई खामोशी है ,
हमारे दिल में सुनायी पड़ी है बात कोई,
फिर मुझे अपने दिल में बिठा गया कोई ,
फिर मुझे अपनी निशानी बता गया कोई।
में रातें, ये बादल, ये हवाएँ , ये घटा,
हमारे साथ रहीं ये तुझे भुलाने में ,
कई दिनों की मोहब्बत का इतना हासिल है,
फिर मुझे आज़ याद आ गया कोई,
फिर मुझे अपनी निशानी बता गया कोई।।
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एक घंटा पहले

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