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शब्दों रूपी हथियार

                
                                                         
                            शब्दों से झलके हमारा प्यार शब्दों से ही तकरार
                                                                 
                            
शब्द ही दर्शाते हैं हम सबके जीवन भर के सँस्कार

शब्दों से ही घाव भरते शब्द ही तो करते हैं घाव
जिसके हैं सँस्कार जैसे वैसे ही तो होंगे उच्चार

शब्दों का है खेल सारा शब्दों का ही है ये तो फ़ेर
शब्द ही सबको दिलाते जीत शब्दों से ही हो हार

कुछ भी मुँह से गर निकालो सोच कर ही तुम निकालो
शब्दों में ही तो बसा है परवरिश का सबकी ही सार

मीठे दो बोलों से हर लो तुम किसी का ग़म भी दिल से
फेंकना मत तुम कभी जहरीले शब्दों रूपी हथियार
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एक घंटा पहले

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