वो हवा के जवाब सिर उठा के देती है
अगर समझा के पूछोगे तो मुस्करा देती है
बदल गया मौसम भी समझाते हुए उसको
क्या समझे नहीं? ज्यादा उलझे तो कह देती है
आज तो उसने हद करदी सपनों में लिया हाल चाल
मेरी बारी पर कहने लगी जागजाओ बताती हूं
उसकी अदाओं का जलवा है सदा मुस्कराकर निकलना है
बताओ सपने तो सलाह देती है सोचते होगे
हसरतें हैं क्या ? दिल में खुलके कह नहीं पाता
ख़ुशी की इन नादानी को ये हवाएं खूब समझती हैं
मुझे नहीं मालूम ये पागलपन कहां तक जाना है ?
बस जहां तक जाना है वहां पहुंच जाए "ऐ हवा"?
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