हर दिल की किताब
हमेशा अधुरी है।
छाप दिए कई सपने
पर पूरे होना भी जरूरी है
कभी पाने की आस हैं
कभी बुझने की प्यास है
कभी खुद की तलाश में
जिंदगी हताश हैं
हर एक कल का पन्ना
बस एक आज का ख़्वाब है
सिर्फ़ आज का पन्ना तू सजा
जिन्दंगी इसी का नाम है
कई सच्चाईया कड़वाहटे
लेकर लाती है।
लिखना फ़िर भी इनको क्योंकि
जीना यहीं तुम्हें सिखाती हैं
जितना मिले उतना कम है
और की खोज में आए सौ गम है
निपटावूं मैं कैसे इनको
जीने के लिए तो सौ साल भी कम है
जुदाई में याद लिखकर
पाने पर खुशियां लिखकर
हर वो तख्त छूती है
फिर भी किताब अधूरी है
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