ना चाहकर भी चाहने पर गम मिला
मोहब्बत थी एक ऐसी सजा
जिस में प्यार भी तो कम मिला
हर वक्त तन्हाई हर मौसम पतझड़ मिला
जब याद आयी तेरी तो आसूंओं का सागर मिला
बिछड़ गई याद पर अफ़सोस हमको फिर मिल
कड़वा है सच पर दिलदार न ऐसा कोई मिला
सबकुछ होकर भी कुछ न होने का एहसास मिला
इश्क विश्क प्यारव्यार बेइंतहा नफ़रत मिला
जिसपर दिल लुटाया वो ही ना सच्चा मिला
प्यार की राह पर ही यार भी कच्चा मिला
बनना संवरना बड़ी हसरतों के बाद मिला
पर बरदाश्त कर ले वो मेरी हर अदा
ऐसा यार ना हमको तू क्यूं मिला
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