कहा गया है शास्त्रों में
कि प्राण:वै अन्नं यानी
अन्न भी प्राण है
इसलिए करते हैं जब हम
भोजन की बर्बादी
या फेंकते हैं
कूड़े में हम अन्न को
तब घोंट रहे होते हैं हम
गाला उस प्राण तत्व का
याद रखिए
रूत गया जिस दिन
अन्न आपसे
उस दिन
चमचमाती कार आपकी
और किश्तों में अर्जित
फ्लैट आपका
इनमें से कोई भी
नहीं मिटा पाएगा
भूख आपकी
इसलिए कीजिए सम्मान
अन्न का
सीखिए उसे सहेजना
न कि उसे कूड़े में
फेंक देना।
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