जब बात हो सुख समृद्धि संपन्नता और खुशी में
शामिल होने की तो दूर दूर तक अपनों से मिलने
पहुंच जाते।
वहीं एक घर छोड़कर कोई अपना ही सगा
कितनी तकलीफ़ में जीवन जी रहा है
उसके घर का पता तक भूल जाता है।
एक छत के नीचे रहकर भी हालचाल नहीं
पूछे जाते वहीं सात समुंदर पार लोग खुशियों में
शामिल होने के लिए चला जाते हैं।
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