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अंदाज़ ए बेरुखी

                
                                                         
                            भटकती तमन्नाओं को समेट लिया हमने जला कर दिया आस का दिल करने इक अर्ज सामने तेरे आए हैं
                                                                 
                            
मिला क्या हमें तेरी बेखुदी से करके इज़हार दर्द अपना राह ए तलब निभा के फर्ज हम सामने तेरे आए हैं
करके दोस्ती कांटों से अब बिखर जाना पड़ा हमें करके गुजारा किसी तरह हुआ जो दर्द सामने तेरे आए है
ऐसा नहीं कि मैंने तुम्हें कभी किया ना हो याद परख के मिजाज़ तेरा करने सजदा हम ही सामने तेरे आए हैं
दिखा के इक झलक रोना तुमने सीखा दिया समझ कर अंदाज़ हुआ जो दर्द हमें कहने सामने तेरे आए हैं
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एक घंटा पहले

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