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अंजाम ए नाकाम जिंदगी

                
                                                         
                            मेरे चेहरे पे खुशियां बरसाओ किसी रोज़ हर रोज़ गरजते हो तुम क्यूं किसी रोज़ तो बरस कर दिखाओ
                                                                 
                            
आकर ख्वाब में गुफ्तगू मुझसे किया करो गैर न समझो हमें दस्तक दिल में देकर बिखर कर दिखाओ
सामने मेरे आकर हाल ए गम कभी पूछ लिया करो मेरे दिल की गली में जब आओ महक कर दिखाओ
ठुकरा मुझे इस तरह होकर खफा किसी गैर के घर ना जाओ बादल की झूम कर घर मेरे आ कर दिखाओ
मैं नहीं चाहता तुम उम्र भर दो मोहलत हमें समझ के जिंदगी मेरी तुम मुझसे ही रंजिश निभा कर दिखाओ
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एक घंटा पहले

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